झूला उत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब, स्वचलित झांकियों के दर्शन को भक्तों का रेला; सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
रायगढ़। श्याम बाबा की असीम कृपा से श्याम मंडल रायगढ़ द्वारा आयोजित 28वें ऐतिहासिक कृष्ण जन्माष्टमी झूला महोत्सव का बुधवार को भव्य शुभारंभ हुआ। पांच दिवसीय यह महोत्सव 2 से 6 सितंबर तक श्याम बगीची परिसर में भक्तिमय वातावरण में मनाया जाएगा।
महोत्सव का शुभारंभ शाम 5 बजे औघड़ संत प्रियदर्शी राम के पावन सानिध्य तथा महापौर जीवर्धन चौहान, सभापति डिग्रीलाल साहू, पार्षद सुरेश गोयल सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी में भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना, महाआरती एवं भोग अर्पित कर किया गया। शुभारंभ के दौरान पूरा श्याम बगीची परिसर भगवान श्रीकृष्ण और श्याम बाबा के जयकारों से गूंज उठा।
प्रियदर्शी राम का आत्मीय स्वागत, भक्तों को दिया सद्कर्म का संदेश
पूजा-अर्चना एवं महोत्सव के शुभारंभ के पश्चात श्याम मंडल समिति और श्याम महिला मंडल की सदस्यों ने औघड़ संत प्रियदर्शी राम पर पुष्पवर्षा कर एवं गुलाब भेंटकर उनका आत्मीय स्वागत किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।
बनोरा आश्रम के संस्थापक प्रियदर्शी राम ने आयोजन के लिए श्याम मंडल समिति के सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि परमात्मा की असीम कृपा से मनुष्य योनि प्राप्त हुई है, इसलिए जीवन में सद्कर्म को सर्वोच्च महत्व देना चाहिए। उन्होंने कहा कि परमात्मा निराकार रूप में प्रत्येक व्यक्ति के कर्मों को देख रहे हैं और उनसे कुछ भी छिपा नहीं है। मोक्ष एवं कल्याण की प्राप्ति के लिए आध्यात्मिक जीवन, परमात्मा की सेवा और जनकल्याण को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। यही मनुष्य जीवन का सार है।
वहीं महापौर जीवर्धन चौहान ने श्याम मंडल द्वारा आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि यहां प्रस्तुत की जाने वाली मनमोहक झांकियां भावी पीढ़ी को भारतीय संस्कृति को देखने और समझने का अवसर देती हैं। उन्होंने आयोजन समिति को बधाई देते हुए सभी श्रद्धालुओं को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
श्याम मंडल के अध्यक्ष बजरंग अग्रवाल ने कहा कि 28वें कृष्ण जन्माष्टमी झूला महोत्सव के शुभारंभ का साक्षी बनना सभी के लिए सौभाग्य का क्षण है। उन्होंने कहा कि श्याम बगीची केवल मंदिर परिसर नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और संस्कार का केंद्र भी है।
उन्होंने बताया कि पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में भक्ति, आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। सनातन संस्कृति और श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित आकर्षक झांकियां नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बनेंगी।
बजरंग अग्रवाल ने कहा कि श्याम मंडल की 28 वर्षों की सेवा यात्रा भक्ति और समर्पण की गौरवपूर्ण यात्रा है। मंडल की सेवाएं केवल आयोजन तक सीमित नहीं हैं। वर्षभर श्रृंगार सेवा, भोग सेवा, पोशाक सेवा, इत्र सेवा, घी सेवा सहित अनेक सेवाएं संचालित की जाती हैं, जिनसे श्याम प्रेमी अपनी श्रद्धानुसार जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा में भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है।
मन मोह रही भव्य और स्वचालित झांकियां
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण कोलकाता के कलाकारों द्वारा फूलों से सजाया गया भव्य फूल बंगला है। वहीं स्वचालित झांकियों को ग्राम अंजोरा (दुर्ग) के कलाकारों ने आकर्षक एवं जीवंत रूप दिया है। इन झांकियों में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदेशों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है।
श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परिसर में अलग से बैरिकेडिंग की गई है। गर्मी से राहत के लिए फॉगिंग सिस्टम, हाईटेक सीसीटीवी कैमरे, दिन-रात सुरक्षा गार्ड तथा पुलिस और ट्रैफिक विभाग के जवानों की तैनाती की गई है।
4 सितंबर को फूलों की वर्षा के बीच मनेगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
4 सितंबर को जन्माष्टमी के मुख्य पर्व पर मधुर भजन-कीर्तन के बीच भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग एवं माखन-मिश्री का भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद फूलों की वर्षा के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। जन्मोत्सव के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया जाएगा। पांच दिवसीय महोत्सव का समापन 6 सितंबर को होगा।
ये स्वचालित झांकियां रहेंगी विशेष आकर्षण
महोत्सव में श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न विषयों पर आधारित स्वचालित झांकियां तैयार की गई हैं। इनमें सिद्धि विनायक गणेश, कृष्ण-सुदामा मिलन, कृष्ण का गौ प्रेम, गोपियों संग रासलीला, कर्माबाई का प्रभु प्रेम, विराट हनुमान-पहाड़ मंदिर, डोरेमोन ड्रीम सिटी, छत्तीसगढ़ की संस्कृति, साइबर क्राइम से बचाव एवं जुआ-सट्टा नियंत्रण संबंधी जागरूकता झांकी तथा अमरनाथ यात्रा की वृहद झांकी प्रमुख हैं।
इसके अलावा मंदिर प्रांगण में लड्डू गोपाल झूला, राधा-कृष्ण झूला और वृंदावन के बांके बिहारी के दर्शन भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

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