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इस्कॉन प्रचार केंद्र रायगढ़ का तीन दिवसीय भागवतम कथा का आयोजन

रायगढ़ 28/01/2026

इस्कॉन प्रचार केंद्र रायगढ़ द्वारा आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करते हुए तीन दिवसीय श्रीमद् भागवतम कथा का भव्य आयोजन किया गया। इस्कॉन रायपुर मंदिर के मुख्य पुजारी मिथिलापति दास के सानिध्य में कृष्ण वाटिका कॉलोनी के उद्यान में आयोजित इस पाठ में शहर के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। 24 से 26 जनवरी तक चले कार्यक्रम के दौरान संपूर्ण परिसर भक्तिमय भजनों और ‘हरे कृष्णा’ के जयघोष से गुंजायमान रहा।

पहले दिन अजामिल की कथा, दूसरे दिन वृत्रासुर की कथा और तीसरे दिन चित्रकेतु की कथा सुनाई गई। कथा से पूर्व और बाद में हरे कृष्ण संकीर्तन किया गया। अंत में प्रश्नावली सत्र में भक्तों के सवालों का जवाब मिथिलापति दास जी ने दिया। इस भागवतम से लोगों का आत्मरंजन हुआ अर्थात ज्ञान जो आत्मा को अच्छा लगे। कई दफा भागवत में ज्ञान से अधिक मनोरंजन हो जाता है। हालांकि भगवान की लीलाओं में मनोरंजन होना। स्वाभाविक है पर ज्ञान मुख्य होना जरूरी भी है।

कथा के प्रथम दिवस पर मुख्य पुजारी मिथिलापति दास ने भागवत के चार प्रमुख स्तंभों—महात्म्य, प्रयोजन, श्रोता और वक्ता के गुणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवतम कथा कोई व्यावसायिक गतिविधि या व्यापार नहीं है, बल्कि यह आत्मा की परमात्मा से मिलन की एक पावन आध्यात्मिक यात्रा है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कथा कहने वाले (वक्ता) और सुनने वाले (श्रोता) दोनों का एकमात्र उद्देश्य शुद्ध भक्ति होना चाहिए। यदि इसमें भौतिक लाभ की इच्छा जुड़ जाए, तो आध्यात्मिक फल की प्राप्ति संभव नहीं है।

*भक्ति मार्ग में सेवा भाव को सर्वोपरि : मिथिलापति दास*

मिथिलापति दास जी ने बताया कि इस्कॉन के भागवतम कथा में 335 अध्याय, 12 स्कंद हैं। कथा तीन से 7 दिनों तक चलती है जिसमें अलग अलग विषय पर चर्चा होती है। ताकि लोगों को भागवतम की शिक्षा का भान हो। समय के अनुसार कथावाचक कथा चुनकर भक्तों को उनकी महत्ता बताते हैं और फिर अंत में उसी विषय पर सवाल जवाब का सत्र भी होता है।

विदित हो कि भागवतम कथा ने हरिनाम के महात्म्य पर तीनों दिन विशेष चर्चा किया गया। मिथिलापति दास ने बताया कि भगवान के एक नाम में इतनी शक्ति है कि कोई भगवान का एक नाम जप श्रद्धापूर्वक करे तो वह अनेक जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है।

उन्होंने गुरुओं की महत्ता बताते हुए कहा कि गुरु की महिमा और कृपा के बिना हम भक्ति क्या किसी भी मार्ग में आगे नहीं बढ़ पाते। हमें गुरु की निंदा, अपमान नहीं करना चाहिए। सदैव गुरु की कृपा प्राप्त करना चाहिए और गुरु की कृपा से ही भागवत कृपा प्राप्त होती है। कथा के समापन सत्र में उन्होंने बताया कि राधा रानी की कृपा और शक्ति के बिना श्रीकृष्ण की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने भक्ति मार्ग में सेवा भाव को सर्वोपरि बताया।

*होली पर होंगे विशेष आयोजन*

होली को इस्कॉन गौर पूर्णिमा के रूप में भव्य तरीके से मनाता है। इस बार 3 मार्च को इस्कॉन प्रचार केंद्र रायगढ़, पल्लवी महल राजा पारा में गौर पूर्णिमा का भव्य आयोजन करने जा रहा है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के बाद इस्कॉन का यह दूसरा सबसे बड़ा आयोजन होता है। जिसमें एक दिन पहले से ही विविध भक्तिमय कार्यक्रम आयोजित होते हैं। 31 जनवरी को इस्कॉन प्रचार केंद्र में नित्यानंद त्रयोदशी पर विशेष आयोजन किया जाएगा।

*सैकड़ों भक्तों ने ग्रहण किया प्रसादम*

तीन दिनों तक चले इस भागवतम के अंत में इस्कॉन के प्रसिद्ध संकीर्तन के साथ आरती की गई। कथा के उपरांत उपस्थित सैकड़ों भक्तों के लिए विशेष महाप्रसादम की व्यवस्था की गई थी। कृष्ण वाटिका कॉलोनी के रहवासियों विशेषकर भूपेश ठाकुर के सहयोग से इस्कॉन रायगढ़ प्रचार केंद्र ने पहली बार रायगढ़ में भागवतम कथा का आयोजन किया। आयोजन समिति ने बताया कि इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और भक्ति मार्ग से जोड़ना है। इस्कॉन रायगढ़ के गिरिराज दास, मधुद्विष दास, संतोष दास बैरागी, आशीष बैरागी, विनोद महाणा जी का विशेष योगदान रहा।

*भावगतम के आयोजन होते रहना चाहिए*

रायगढ़ में पहली बार भावगतम कथा का आयोजन करने वाले भूपेश ठाकुर ने बताया कि वह भागवत कथा सुनते आ रहे हैं। पर इस्कॉन के भागवतम में जिस तरह से एक-एक अध्याय और उसके महत्व को समझाया गया वैसा उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं किया। गीता सार को समझने के लिए भावगतम से बेहतर कोई जरिया नहीं है। मैं उम्मीद करता हूं कि अब से रायगढ़ में भागवतम कथा के आयोजन होते रहेंगे। इस्कॉन प्रचार केंद्र रायगढ़ लगातार श्री कृष्ण भक्ति के प्रचार के लिए पूरे जिले में विविध आयोजन कर रहा है।

*इस्कॉन का उद्देश्य*

इस्कॉन प्रचार केंद्र रायगढ़ प्रभारी मधुद्विष दास ने बताया कि इस्कॉन का उद्देश्य श्रीकृष्ण भावनामृत को विश्वभर में फैलाना है, जिससे लोग भगवान कृष्ण की भक्ति और प्रेम को अपने जीवन में अपनाएं। इस्कॉन आध्यात्मिक ज्ञान और वैदिक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम करता है, जिससे लोगों को अपने जीवन के उद्देश्य और अर्थ को समझने में मदद मिले। इस्कॉन सामुदायिक सेवा गतिविधियों में भी शामिल होता है, जैसे कि भोजन वितरण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना।

संस्था का उद्देश्य लोगों में भक्ति और प्रेम की भावना को बढ़ावा देना है, जिससे वे अपने जीवन में सुख, शांति और संतुष्टि प्राप्त कर सकें। इस्कॉन के संस्थापक आचार्य श्रील ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने इस संस्था की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य वैदिक ज्ञान और कृष्ण भावनामृत को विश्वभर में फैलाना था।

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