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रायगढ़ में धान उत्पादन का नया रिकॉर्ड, लेकिन खरीदी नीति पर उठे सवाल

vikas24 · 2 मार्च 2026 · रायगढ़

चार साल में औसत पैदावार बढ़ी, फिर भी कई समितियों में 15–16 क्विंटल तक सीमित रही खरीदी

रायगढ़। जिले में धान उत्पादन ने पिछले चार वर्षों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सिंचित और असिंचित दोनों क्षेत्रों में औसत उत्पादन करीब दो क्विंटल प्रति एकड़ तक बढ़ा है। इसके बावजूद खरीदी के अंतिम चरण में लागू अनावरी और ग्रामवार कोटा निर्धारण ने किसानों के बीच असमानता की भावना पैदा कर दी है। बढ़ती पैदावार और सीमित खरीदी के बीच का यह अंतर अब रायगढ़ की कृषि व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

उत्पादन के आंकड़े क्या कहते हैं

कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा किए गए फसल कटाई प्रयोग के आधार पर जिले की उत्पादकता तय होती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में सिंचित भूमि पर औसत उत्पादन 20.56 क्विंटल प्रति एकड़ था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 22.91 क्विंटल हो गया। इसी अवधि में असिंचित भूमि का औसत 16.10 से बढ़कर 18.55 क्विंटल प्रति एकड़ दर्ज किया गया।

बीच के वर्षों में भी वृद्धि का क्रम जारी रहा। 2023-24 में सिंचित उत्पादन 22.35 और 2024-25 में 23.85 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंचा। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि तकनीकी सुधार, बेहतर बीज और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का असर जमीन पर दिखा है। यही तथ्य इन दिनों रायगढ़ समाचार की प्रमुख चर्चा का विषय बने हुए हैं।

खरीदी में क्यों नहीं दिखा पूरा असर

सरकार ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी की घोषणा की थी, लेकिन अंतिम चरण में अनावरी लागू की गई। कई समितियों में 15 या 16 क्विंटल तक ही धान स्वीकार किया गया। खरीदी का कोटा जिला औसत के बजाय ग्रामवार आंकड़ों पर आधारित रहा, जिससे लाभ में एकरूपता नहीं रही।

किसानों का तर्क है कि जब सरकारी रिकॉर्ड में औसत उत्पादन बढ़ा है तो खरीदी भी उसी अनुपात में होनी चाहिए थी। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि फसल बीमा और डीसीएस डाटा के आधार पर ग्राम स्तर पर उत्पादन का आकलन किया जाता है, और उसी के अनुसार सीमा तय होती है। फिर भी यह मुद्दा ताजा खबर रायगढ़ की सूची में लगातार बना हुआ है।

धान की फसल राज्य की राजनीति में भी केंद्र में है। पहले 18 क्विंटल और बाद में 21 क्विंटल प्रति एकड़ खरीदी की घोषणा ने इसे चुनावी मुद्दा बना दिया। वर्तमान में 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर किसानों के लिए आकर्षक है, जिससे धान की ओर झुकाव बढ़ा है।

सिंचाई और फसल पैटर्न पर प्रभाव

बढ़ी हुई कीमत और सुनिश्चित खरीदी ने किसानों को धान की ओर केंद्रित कर दिया है। सिंचाई संसाधनों का बड़ा हिस्सा अब इसी फसल में उपयोग हो रहा है। इससे अल्पकालिक आय में वृद्धि हुई है, लेकिन फसल विविधीकरण की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। यह पहलू व्यापक छत्तीसगढ़ अपडेट के कृषि विश्लेषण में भी उभरकर सामने आ रहा है।

रायगढ़ पर वास्तविक असर

उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ा है। बाजारों में खरीद क्षमता मजबूत हुई है, जिससे खाद-बीज दुकानों, कृषि उपकरण व्यापारियों और स्थानीय मंडियों को लाभ मिला है। हालांकि खरीदी सीमा कम होने पर अतिरिक्त धान को खुले बाजार में बेचना पड़ सकता है, जिससे किसानों की संभावित आय घट सकती है।

यदि नीति और उत्पादन के बीच संतुलन नहीं बैठा तो प्रशासनिक स्तर पर दबाव बढ़ सकता है। स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि पारदर्शी और एकरूप व्यवस्था लागू करे ताकि विवाद की स्थिति न बने।

आगे की दिशा

अब सवाल यह है कि क्या आगामी सीजन में औसत उत्पादन के आधार पर खरीदी मानकों की समीक्षा होगी। बढ़ती उत्पादकता एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन नीति में समन्वय जरूरी है।

किसानों की अपेक्षा है कि वास्तविक आंकड़ों के अनुरूप खरीदी व्यवस्था तय हो। वहीं प्रशासन के लिए यह अवसर भी है कि वह डेटा आधारित, पारदर्शी और संतुलित मॉडल विकसित करे।

रायगढ़ की खेती नई ऊंचाई छू रही है। अब यह देखना होगा कि क्या नीतिगत फैसले भी उसी गति से आगे बढ़ते हैं या नहीं।

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